Tuesday, October 13, 2015

Round 1 - Team # 13 (Harendra & Ankur)

मित्रता

एक जगह है नंदन कानन वन जहा कई जानवर रहते है इसमें भूरा भालू प्रमुख है वो पुरे वन का एकलौता ऐसा जीव है जिसके पास स्विमिंग पूल है वो रोज उस पूल में मजे से रोज नहाता है उसके कुछ दोस्त है जिनमे प्रमुख है – चमकी हिरनी , हरिया तोता और पिंटू खरगोश 
चारो दोस्त राज शाम को भूरा भालू के स्विमिंग पूल में मिलते है और जम कर मस्ती करते है 
सितम्बर का महिना नजदीक आने लगा पर इस बार बारिश कम हुई 
जिसपे भूरा को नहाने के लिए पानी नहीं मिल पा रहा था ... उसने एक नयी तरकीब निकली वो रोज शाम को चुपके से गाड़ी से निकल जाता और तालाब पर जा कर रुक जाता है और वही नहाने लगता 
उसको वहा नहाता देख कर कुछ लोग मजाक उड़ाने लगे .. इससे उसे शर्मिंदगी महसूस हुई और उन्हें सबक सिखाने का प्रण ले लिया 
अगले दिन भूरा तालाब पर एक मोटर ले गया और उसे चालू कर दिया मोटर में 2 पाइप लगी हुई थी एक पाइप से पानी पाइप से खीच रहा था और दुसरे पाइप से भूरा के स्विमिंग पूल में वही पानी निकल रहा था यानी भूरा तालाब के पानी का इस्तेमाल खुद के नहाने के लिए कर रहा था 
सभी जानवर भूरा के इस रवैये से परेशान हो गए .. किसी को समझ नहीं आ रहा था की कैसे भूरा को समझाया जाए 
पिंटू खरगोश ने सभी को भरोसा दिलाया की वो भूरा को समझा सकता है वो भूरा के घर पहुंचा .. और काल बेल दबाई 
भूरा ने दरवाजा खोला - 
भूरा – ओये पिंटू तू यहाँ .. तू तो शाम को आने वाला था न नहाने के लिए सबके साथ में .. 
पिंटू – हा आने वाला था पर अभी आ गया तुझसे कुछ ख़ास बात करनी है अभी 

भूरा – बोल न पिंटू क्या बात करनी है 
पिंटू – यार पुरे वन में पानी की कमी है .. और इन सभी के जीने का सहारा बस यही तालाब बचा है और इसका पानी भी तू सोख ले रहा है .. बता बाकि जानवर क्या करेंगे 

भूरा – तो तू भी आ गया मुझे समझाने ..इस तालाब पर किसी का नाम नहीं लिखा है .. मेरे जो मर्जी आयेगा मै वो करूँगा 
पिंटू – आखिर ऐसा क्या हो गया भूरा तू उतना बिगड़ क्यों रहा है .. किसी ने कुछ कहा क्या तुझसे 
भूरा – मै एक दिन नहा रहा था तलब में तब इन लोगो ने मेरा मजाक बनाया इसलिए .. मैंने फैसला किया है अब मै वहा नहीं नहाऊंगा .. साथ ही उन्हें सबक भी सिखाऊंगा 

पिंटू – पर ये सही नहीं है भाई .. सबका पानी पर बराबर का हक है 
भूरा – देख पिंटू .. मुझे ये सही लगता है और मै यही करूँगा तुझे अगर नहीं पसंद है तो चला जा यहाँ से दोस्ती ख़तम अपनी 

पिंटू आवाक सा भूरा का चेहरा देखता रह गया .. कितनी आसानी से भूरा ने बरसो पुरानी दोस्ती तोड़ दी .. जरा भी ख्याल नहीं आया दोस्ती का .. पिंटू मन मसोस कर भूरा के घर से बाहर निकला 

इधर भूरा भी खुश नहीं था पिंटू से अपनी दोस्ती तोड़ के .. पर उसका झूठा अहंकार उसे और भड़का रहा था .. वो मन ही मन सोच रहा था 
कैसा अजीब दोस्त है पिंटू .. वो तो दोस्त कहलाने के लायक ही नहीं है .. अरे दोस्त वो होता है जो दोस्त की हर हाल में मदद करे .. चाहे वो सही हो या गलत उसे ही सच्चा दोस्त कहते है ...

भूरा और पिंटू की दोस्ती ख़तम हो गई है ये बात पूरा जंगल कुछ ही देर में जान गया .. चमकी और हरिया ने बहुत समझाया भूरा को पर वो माने वाला नहीं था सो नहीं माना 

भूरा ने अपने घर के पीछे एक पौधा लगा रखा था लौकी का .. पर वो फल फूल नहीं रहा था .. अब वो किस्से मदद ले समझ नहीं आ रहा था .. अचानक भूरा को याद आया की पिंटू ने भी लौकी का पेड लगाया है भूरा चुपके से पिंटू के घर के पास गया और वहा देखता है की पिंटू ने पौधे की जड़ के आस – पास मिटटी खोद के गोबर भर दिया है .. और पौधे को एक जाली में कैद कर दिया है .. जैसे शहरो में सड़क के किनारे पौधे लगते है .. जाली या ईंटो से घेर के ... वैसा बना दिया है पिंटू ने 

भूरा चुप-चाप पिंटू के घर से निकला और अपने घर पहुंचा उसने वैसे ही किया .. जैसा देखा था .. पौधे के चारो तरफ की मिटटी खोदी .. पर गोबर कहा से पाए .. उसे कुछ नहीं सुझा तो .. नाली की काली मिटटी निकाल कर .. पौधे के गड्ढे में भर दिया .. अब बारी थी जाली की .. तो यहाँ भी भरा ने थोडा ज्यादा दिमाग लगाया और अपने गैराज में पड़े टीना से पुरी तरह ढक दिया 

कुछ दिनों बाद भूरा ने टीना उठा के देखा तो .. दंग रह गया .. पेड़ लगभग मुरझा गया था .. वो भागता भागता पिंटू के घर पहुंचा .. वहा क्या देखता है की .. लौकी के पौधों में फूल लगने लगे है ..
अब भूरा से रहा नहीं गया वो फ़ौरन पिंटू के पास गया और 
भूरा – मुझे माफ़ कर दे पिंटू मुझसे गलती हो गई .. 
पिंटू – कोई बात नहीं भाई .. देर आये दुरास्त आये बताओ यहाँ कैसे आना हुआ 

भूरा – भाई मुझे तुम्हारी मदद चाहिए .. मेरा लौकी का पौधा सुख रहा है ..
पिंटू – ओह्ह ऐसा क्या चलो देखते है ..

पिंटू भूरा के साथ चला जाता है भूरा के घर पहुँच कर देखता है तो दंग रह जाता है .. पिंटू जल्दी से जड़ की मिटटी को साफ़ करता है .. और उसमे पानी डालता है .. टिने को निकाल कर बाहर करता है ... और अपने यहाँ से ले आ कर जाली लगा देता है .. 

कुछ दिन में भूरा के यहाँ भी लौकी फूल ले लेता है .. और दोनों में दोस्ती भी हो जाती है .. और अब भूरा पानी का दुरूपयोग भी नहीं करता है.

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Mitrta by Harendra Saini and Ankur Singh

Rating - 90/200

Judge - Mr. Mayank Sharma

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